शीतली प्राणायाम — विधि और फायदे
शीतली प्राणायाम शरीर को तुरंत ठंडक देने वाला एक सरल प्राणायाम है। पूरी विधि और फायदे जानें, Habuild के साथ रोज़ अभ्यास शुरू करें।

Key Takeaways
- जीभ को नली की तरह मोड़कर सांस अंदर लेने से शरीर को ठंडक मिलती है।
- जिनकी जीभ न मुड़े, वे दांत भींचकर सीतकारी विधि से यही अभ्यास कर सकते हैं।
- यह चक्र 5-10 बार दोहराएं, सांस अंदर और बाहर दोनों धीमी गति से लें।
- गुस्सा, चिड़चिड़ापन और गर्मी के मौसम में राहत के लिए उपयोगी माना जाता है।
- सर्दी-ज़ुकाम, अस्थमा या ठंड के मौसम में इस अभ्यास से बचना बेहतर है।
शीतली प्राणायाम का अर्थ है “शीतल करने वाली सांस” — इसमें जीभ को नली की तरह मोड़कर उससे सांस अंदर ली जाती है, जिससे शरीर को ठंडक मिलती है। हठ योग की परंपरा में इसे शरीर की अतिरिक्त गर्मी शांत करने वाले चुनिंदा प्राणायामों में गिना गया है। जिन लोगों की जीभ नहीं मुड़ पाती — यह महज़ शरीर की बनावट का फर्क है, अभ्यास की कमी नहीं — वे दांत भींचकर भी यह अभ्यास कर सकते हैं, जिसे सीतकारी कहते हैं और जिसका फर्क आगे इस लेख में विस्तार से बताया गया है।
Sheetali Pranayama Steps
Sheetali pranayama steps सीखना आसान है, बस शुरुआत में थोड़ा अभ्यास चाहिए:
- रीढ़ सीधी रखते हुए आराम से बैठें — ज़मीन पर पालथी मारकर या कुर्सी पर, जो भी सहज लगे।
- जीभ को नली के आकार में मोड़ें और होंठों से थोड़ा बाहर निकालें।
- जीभ से धीरे-धीरे, गहरी सांस अंदर लें, जैसे स्ट्रॉ से ठंडा पानी पीते हैं — हवा जीभ पर ठंडी महसूस होनी चाहिए।
- जीभ अंदर लें, मुंह बंद करें, और नाक से धीरे-धीरे, पूरी तरह सांस छोड़ें।
- यह पूरा चक्र 5-10 बार दोहराएं, हर सांस के बीच सामान्य गति बनाए रखें।
आम गलतियां: कई लोग सांस बहुत तेज़ खींचते हैं, जिससे ठंडक का असर कम हो जाता है — धीमी और गहरी सांस ही असली फायदा देती है। दूसरी गलती है सांस छोड़ते समय जल्दबाज़ी करना; सांस छोड़ना भी उतना ही धीमा होना चाहिए जितना अंदर लेना। अगर मुंह सूखने लगे तो एक-दो चक्र के बाद रुककर सामान्य सांस लें।
Sheetali Pranayama ke Fayde
Sheetali pranayama ke fayde में शरीर की गर्मी कम होना, गुस्सा और चिड़चिड़ापन शांत होना, और गर्मी के मौसम में राहत शामिल है। यह अभ्यास खासतौर पर गर्म मौसम में या तेज़ व्यायाम के बाद ठंडक पाने के लिए उपयोगी माना जाता है। जीभ और मुंह की सतह से ठंडी हवा अंदर जाने से शरीर को तुरंत ठंडक का अहसास होता है, और साथ ही धीमी, लयबद्ध सांस तंत्रिका तंत्र को भी शांत करने में मदद करती है — यही वजह है कि गुस्से या तनाव के क्षण में शीतली प्राणायाम को खासतौर पर सुझाया जाता है।
शीतली और सीतकारी प्राणायाम में फर्क
जो लोग जीभ को नली के आकार में नहीं मोड़ पाते, उनके लिए सीतकारी एक स्वाभाविक विकल्प है। इसमें जीभ को तालू से हल्का सा सटाकर दांत भींचे जाते हैं, और होंठ थोड़े खुले रखकर उन्हीं के बीच से सांस अंदर ली जाती है — आवाज़ हल्की “सी…” जैसी होती है, इसीलिए इसे सीतकारी कहा जाता है। असर लगभग वैसा ही ठंडक देने वाला होता है, बस तकनीक अलग है। दोनों में से जो भी सहज लगे, वही अपनाया जा सकता है — शीतली प्राणायाम और सीतकारी को अक्सर एक-दूसरे का विकल्प माना जाता है।
Photo: Thamizhpparithi Maari, CC BY-SA 3.0, via Wikimedia Commons
शीतली प्राणायाम बनाम भस्त्रिका प्राणायाम
शीतली प्राणायाम शरीर को ठंडा और शांत करता है, जबकि भस्त्रिका प्राणायाम इसके ठीक उलट है — यह शरीर में गर्मी और ऊर्जा बढ़ाने वाला तेज़ श्वास अभ्यास है। दोनों अलग-अलग मौसम और ज़रूरत के लिए उपयोगी हैं: गर्मी के मौसम में या मन को शांत करना हो तो शीतली प्राणायाम बेहतर है, जबकि सुस्ती दूर करनी हो या ठंड के मौसम में शरीर गर्म करना हो तो भस्त्रिका ज़्यादा उपयुक्त है। दोनों को समझने के लिए हमारी गाइड Bhastrika Pranayam भी देखें।
सावधानियां
शीतली प्राणायाम ठंड के मौसम में, सर्दी-ज़ुकाम, अस्थमा या ब्रोंकाइटिस की स्थिति में नहीं करना चाहिए, क्योंकि इसमें मुंह से ठंडी हवा सीधे अंदर ली जाती है। दांतों में ठंडक के प्रति संवेदनशीलता हो तो भी सावधानी बरतें, और बहुत ठंडी या धूल-प्रदूषित हवा वाली जगह पर अभ्यास न करें। कम रक्तचाप वाले लोग भी सावधानी बरतें, क्योंकि यह अभ्यास रक्तचाप को और कम कर सकता है। गर्भावस्था के दौरान किसी भी नए प्राणायाम अभ्यास से पहले डॉक्टर या अनुभवी शिक्षक से सलाह लेना बेहतर है।
अंग्रेज़ी में विस्तृत जानकारी के लिए Sheetali Pranayama गाइड देखें।
किसके लिए यह खासतौर पर उपयोगी है
शीतली प्राणायाम उन लोगों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है जो गर्म तासीर महसूस करते हैं, जिन्हें अक्सर गुस्सा जल्दी आता है, या जो गर्मी के मौसम में असहज महसूस करते हैं। खिलाड़ी और व्यायाम करने वाले लोग भी इसे तेज़ शारीरिक गतिविधि के बाद शरीर को जल्दी सामान्य करने के लिए इस्तेमाल करते हैं। चूंकि इसमें कोई उपकरण नहीं चाहिए और यह कुछ ही मिनट में किया जा सकता है, दफ़्तर में तनाव भरे पल में भी शीतली प्राणायाम एक व्यावहारिक विकल्प बन जाता है — बस इतना ध्यान रखें कि आसपास की हवा साफ़ और कमरे के तापमान जैसी हो, बहुत ठंडी न हो।
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