अनुलोम विलोम प्राणायाम — विधि और फायदे
अनुलोम विलोम प्राणायाम के सही स्टेप्स, फायदे और सावधानियां जानें। Habuild के साथ रोज़ योग और प्राणायाम अभ्यास शुरू करें।

Key Takeaways
- अनुलोम विलोम में एक नथुने से सांस लेकर दूसरे से छोड़ी जाती है, फिर क्रम बदलता है।
- नासाग्र मुद्रा में अंगूठे और अनामिका उंगली से बारी-बारी नथुने बंद किए जाते हैं।
- सांस लेने-छोड़ने की गिनती बराबर रखना अभ्यास को सहज बनाता है।
- शुरुआत पांच मिनट से करें, धीरे-धीरे 15-20 मिनट तक बढ़ाएं।
- यह तनाव कम करने, मन शांत रखने और रक्तचाप संतुलित रखने में सहायक है।
- यह दवा या इलाज का विकल्प नहीं, बल्कि एक सहायक आदत है।
अनुलोम विलोम प्राणायाम भारत में सबसे लोकप्रिय और सबसे ज़्यादा अभ्यास किए जाने वाले प्राणायामों में से एक है — इसमें एक नथुने से सांस अंदर ली जाती है और दूसरे से बाहर छोड़ी जाती है, फिर क्रम बदल दिया जाता है।
Anulom Vilom Pranayama Steps
Anulom vilom pranayama steps बेहद सरल हैं:
- रीढ़ सीधी रखते हुए आराम से बैठें, दाएं हाथ को नासाग्र मुद्रा में लाएं — अंगूठा दाएं नथुने पर, अनामिका और छोटी उंगली बाएं नथुने पर, बाकी दो उंगलियां हल्के से मोड़ लें।
- दाएं हाथ के अंगूठे से दायां नथुना बंद करें और बाएं नथुने से धीरे-धीरे, 4 गिनती तक सांस अंदर लें।
- अब अनामिका उंगली से बायां नथुना भी बंद करें (दोनों नथुने एक पल के लिए बंद रहेंगे), फिर अंगूठा हटाकर दाएं नथुने से 4 गिनती तक सांस छोड़ें।
- फिर उसी दाएं नथुने से सांस लें, दायां नथुना बंद करें, और बाएं नथुने से सांस छोड़ें — यह एक पूरा चक्र हुआ।
- सांस लेने और छोड़ने की गिनती बराबर रखने की कोशिश करें — जैसे 4 गिनती अंदर, 4 गिनती बाहर। अनुभव बढ़ने पर छोड़ने की गिनती थोड़ी लंबी की जा सकती है।
- शुरुआत में 5 मिनट, धीरे-धीरे 15-20 मिनट तक बढ़ाएं।
आम गलतियां और उन्हें कैसे सुधारें
सबसे आम गलती है सांस को रोक-रोक कर, झटकों में लेना — अनुलोम विलोम प्राणायाम में सांस की गति एकदम स्थिर और धीमी होनी चाहिए, हड़बड़ी में नहीं। दूसरी गलती है नथुना बदलते समय सांस को बीच में रोक देना, जिससे लय टूट जाती है — उंगलियां बदलते समय भी सांस की गति सहज बनी रहनी चाहिए। तीसरी आम गलती है कंधों और चेहरे में तनाव रखना — हाथ को नाक तक ऊपर उठाए रखने से कंधा अक्सर अकड़ जाता है; कोहनी को शरीर के करीब रखने और हाथ को हल्का रखने से यह समस्या कम हो जाती है। अगर एक नथुना बंद महसूस हो और सांस लेना मुश्किल लगे, तो ज़बरदस्ती न करें — यह सामान्य है, दूसरे नथुने से थोड़ा ज़्यादा अभ्यास करें और शरीर को समय दें।
अनुलोम विलोम प्राणायाम के फायदे
अनुलोम विलोम प्राणायाम तनाव कम करने, मन को शांत रखने और रक्तचाप संतुलित रखने में मददगार माना जाता है। यह इतना सरल और सुरक्षित है कि लगभग हर उम्र के लोग इसे बिना किसी परेशानी के कर सकते हैं। ध्यान रहे, यह किसी दवा या इलाज का विकल्प नहीं है — डॉक्टर की सलाह और इलाज के साथ इसे एक सहायक आदत के रूप में अपनाएं।
एक नथुने से सांस लेने और दूसरे से छोड़ने की धीमी, बराबर लय शरीर को यह संकेत देती है कि फिलहाल कोई खतरा नहीं है, जिससे तंत्रिका तंत्र धीरे-धीरे आराम की स्थिति में चला जाता है। यही कारण है कि अनुलोम विलोम प्राणायाम के बाद कई अभ्यासी हल्कापन, स्पष्ट सोच और शांत मन महसूस करने की बात करते हैं। दिनभर की भागदौड़ और स्क्रीन के सामने बीतने वाले घंटों के बीच, यह अभ्यास दिमाग को थोड़ी देर के लिए धीमा करने का एक आसान ज़रिया बन जाता है।
Photo: Rajanbastola, CC BY-SA 4.0, via Wikimedia Commons
Anulom Vilom ke Spiritual Benefits
Anulom vilom ke spiritual benefits की बात करें तो पारंपरिक योग में इसे इड़ा और पिंगला नाड़ी को संतुलित करने वाला अभ्यास माना जाता है, जिससे मानसिक स्पष्टता और आंतरिक शांति बढ़ती है। इस मान्यता को वैज्ञानिक प्रमाण की ज़रूरत नहीं, फिर भी नियमित अभ्यास से शांति का अनुभव कई लोग करते हैं।
अगर आप इसकी अधिक विस्तृत जानकारी अंग्रेज़ी में चाहते हैं, तो Anulom Vilom Pranayama गाइड ज़रूर पढ़ें।
किन्हें सावधानी बरतनी चाहिए
अनुलोम विलोम प्राणायाम ज़्यादातर लोगों के लिए सुरक्षित माना जाता है, फिर भी कुछ स्थितियों में सावधानी ज़रूरी है। गंभीर साइनस संक्रमण या पूरी तरह बंद नाक की स्थिति में अभ्यास से पहले आराम करें, क्योंकि नाक बंद होने पर सही तकनीक अपनाना मुश्किल हो जाता है। हाल ही में नाक की सर्जरी हुई हो, तो डॉक्टर की अनुमति के बाद ही अभ्यास शुरू करें। सामान्यतः यह अभ्यास इतना कोमल है कि गर्भवती महिलाएं, बुज़ुर्ग और बच्चे भी इसे सही मार्गदर्शन में कर सकते हैं — यही बात इसे भस्त्रिका या कपालभाति जैसे ज़्यादा ज़ोरदार प्राणायामों से अलग बनाती है। जहां भस्त्रिका और कपालभाति में सांस तेज़ और ज़ोरदार होती है, वहीं अनुलोम विलोम प्राणायाम पूरी तरह धीमा और शांत करने वाला अभ्यास है, इसलिए इसे दिन में कभी भी — यहां तक कि सोने से ठीक पहले भी — किया जा सकता है, जबकि ऊर्जावान प्राणायाम शाम या रात के लिए उपयुक्त नहीं माने जाते।
अभ्यास को धीरे-धीरे कैसे आगे बढ़ाएं
शुरुआती दिनों में 4 गिनती अंदर और 4 गिनती बाहर का बराबर अनुपात सबसे आसान और सुरक्षित तरीका है। कुछ हफ्तों के नियमित अभ्यास के बाद, जब सांस पर नियंत्रण थोड़ा सहज लगने लगे, तो छोड़ने की गिनती को धीरे-धीरे बढ़ाया जा सकता है — जैसे 4 गिनती अंदर, 6 गिनती बाहर, फिर आगे चलकर 4:8 का अनुपात भी अपनाया जा सकता है। लंबी सांस छोड़ना तंत्रिका तंत्र को और गहराई से शांत करने में मदद करता है, इसलिए यह प्रगति स्वाभाविक रूप से अभ्यास को ज़्यादा असरदार बनाती है। जल्दबाज़ी में गिनती न बढ़ाएं — अगर सांस लेने में हल्की भी तकलीफ महसूस हो, तो वापस 4:4 के अनुपात पर लौट आएं। कुछ अनुभवी अभ्यासी बीच में कुछ पल के लिए सांस रोकने (अंतरिक कुंभक) का हल्का अभ्यास भी जोड़ते हैं, पर यह चरण केवल किसी योग्य शिक्षक के मार्गदर्शन में ही सीखना चाहिए, क्योंकि गलत तरीके से सांस रोकने से चक्कर या बेचैनी महसूस हो सकती है।
दिन के किस समय करें
अनुलोम विलोम प्राणायाम सुबह खाली पेट सबसे असरदार माना जाता है, क्योंकि उस समय मन अपेक्षाकृत शांत होता है और अभ्यास के बाद की स्पष्टता पूरे दिन बनी रहती है। पर जिनके पास सुबह समय नहीं होता, वे इसे शाम को हल्के भोजन के कुछ घंटों बाद भी कर सकते हैं। ऑफिस या पढ़ाई के तनावपूर्ण दिन के बीच में भी 5 मिनट का एक छोटा राउंड मन को रीसेट करने में मदद करता है — इसके लिए लेटने या विशेष जगह की ज़रूरत नहीं, बस शांति से बैठने भर की जगह काफी है।
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